बेतिया राज कचहरी (Bettiah raj kachari) रियासत के प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों का मुख्य केंद्र।
- Tanweer adil

- 4 जन॰
- 2 मिनट पठन

बेतिया राज की राज कचहरी (Bettiah raj kachari) रियासत के प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों का मुख्य केंद्र थी। 2026 की जानकारी और इसके ऐतिहासिक संदर्भ में मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
प्रशासनिक केंद्र: राज कचहरी वह स्थान था जहाँ से विशाल बेतिया रियासत (लगभग 2,000 वर्ग मील) का राजस्व संग्रहण और शासन प्रबंध संचालित होता था। यह रियासत की शक्ति और नौकरशाही का प्रतीक थी।
कोर्ट ऑफ वार्ड्स का नियंत्रण: 1893 में महाराजा हरेंद्र किशोर सिंह की मृत्यु और 1897 में महारानी जानकी कुंवर के शासन के दौरान, रियासत का प्रबंधन अंग्रेजों के 'कोर्ट ऑफ वार्ड्स' (Board of Revenue) के अधीन आ गया। इसके बाद राज कचहरी का उपयोग सरकारी अधिकारियों द्वारा राज की संपत्तियों के प्रबंधन के लिए किया जाने लगा।
स्थापत्य: राज कचहरी और उससे जुड़ी इमारतें (जैसे रानी निवास) इंडो-यूरोपीय शैली में बनी थीं। हालाँकि, उचित रखरखाव के अभाव में पिछले कुछ दशकों में ये इमारतें जर्जर अवस्था में पहुँच गई थीं।
सरकारी अधिग्रहण (2024-2026):
बिहार सरकार ने 'बेतिया राज संपत्ति अधिग्रहण विधेयक 2024' पारित किया, जिसके बाद राज कचहरी सहित राज की समस्त 15,358 एकड़ जमीन आधिकारिक तौर पर राज्य सरकार की संपत्ति बन गई है।
2025-2026 के दौरान, शिक्षा विभाग (विशेषकर पूर्व मुख्य सचिव के.के. पाठक के कार्यकाल के दौरान शुरू किए गए प्रयासों के तहत) ने राज कचहरी और रानी निवास जैसी ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण और उनके परिसर में नए शैक्षणिक संस्थान या प्रशासनिक कार्यालय स्थापित करने की योजना बनाई है।
महत्व: राज कचहरी केवल एक भवन नहीं बल्कि चंपारण के उस ऐतिहासिक युग की गवाह है जब बेतिया राज बिहार की दूसरी सबसे बड़ी जमींदारी थी, जिसका प्रभाव उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ था।




टिप्पणियां