बेतिया का मीना बाजार चंपारण के सबसे पुराने और ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्रों में से एक।
- Tanweer adil

- 4 जन॰
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बेतिया का मीना बाजार (Meena Bazar) चंपारण के सबसे पुराने और ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्रों में से एक है। 2026 की स्थिति और इसके इतिहास के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
स्थापना: मीना बाजार की स्थापना बेतिया राज के महाराज दिलीप सिंह (शासनकाल: 1694-1715) ने 17वीं-18वीं शताब्दी के दौरान की थी। इसे लगभग 325 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है और इसे उस समय का "आधुनिक मॉल" कहा जा सकता था।
उद्देश्य: महाराज ने स्थानीय जनता और राज के अतिथियों की सुविधा के लिए शहर के दक्षिणी हिस्से में इस बाजार को विकसित किया था। यहाँ एक ही छत के नीचे सुई से लेकर कीमती कपड़ों और दैनिक उपयोग की सभी वस्तुएं उपलब्ध होती थीं।
ऐतिहासिक संरचना:
बाजार के बीचों-बीच पेयजल के लिए एक कुआं खुदवाया गया था, जो आज भी वहां मौजूद है।
सुरक्षा और प्रबंधन के लिए बाजार में प्रवेश के चार द्वार बनाए गए थे और रोशनी के लिए मशालों व दीपों का उपयोग होता था।
ब्रिटिश शासन के दौरान भी इस बाजार की रौनक कम नहीं हुई और यह अंतर-राज्यीय व्यापार का प्रमुख केंद्र बना रहा।
सांस्कृतिक महत्व: चंपारण में आज भी शादी-ब्याह या बड़े उत्सवों के लिए खरीदारी की पहली पसंद मीना बाजार ही है। यह बाजार न केवल व्यापार का, बल्कि बेतिया की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक जुड़ाव का भी प्रतीक रहा है।
आधुनिक विकास (2025-2026):
कायाकल्प योजना: मई 2025 में बेतिया नगर निगम ने मीना बाजार के जीर्णोद्धार के लिए लगभग ₹52 लाख की विकास योजनाओं को मंजूरी दी है।
इस योजना के तहत ऐतिहासिक कुओं की मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था में सुधार और बाजार क्षेत्र को अधिक सुव्यवस्थित बनाने का कार्य 2026 में जारी है।




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